UP SI Moolvidhi Mock Test in Hindi
“मूल विधि” (Mool Vidhi) उत्तर प्रदेश पुलिस सब-इंस्पेक्टर (UP SI) परीक्षा के सामान्य ज्ञान/संविधान अनुभाग का एक बहुत
महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह विषय उम्मीदवारों की कानूनी समझ, पुलिसिंग से संबंधित कानूनों और भारतीय संविधान के
महत्वपूर्ण प्रावधानों के ज्ञान का परीक्षण करता है। आप सभी को बता दू कि इसमें हम आप सभी को UP SI Moolvidhi
Mock Test in Hindi वे ही प्रश्न होगे जो गत परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण होगे ।हम आपको इस लेख में कुल 40 प्रश्न
बहुविकल्पीय प्रकार के होगे । जो कि विगत गत उत्तर प्रदेश दरोगा के परीक्षा में पूछे गये है ।
सिलेबस का हिस्सा: यह सामान्य ज्ञान (General Knowledge) प्रश्न पत्र के 40 प्रश्नों में शामिल होता है, जिसके लिए कुल 100 अंक निर्धारित होते हैं, जहाँ प्रत्येक प्रश्न 2.5 अंक का होता है।
चयन में महत्वपूर्ण: गणित और रीजनिंग में अच्छा स्कोर करने वाले उम्मीदवारों से आगे निकलने के लिए मूल विधि और हिंदी में अच्छा प्रदर्शन करना महत्वपूर्ण है।
अनिवार्य अर्हता: इस सेक्शन (सामान्य ज्ञान/संविधान/मूल विधि) में न्यूनतम अर्हक अंक (लगभग 50%) प्राप्त करना अनिवार्य होता है
मूल विधि के चैप्टर के नाम बताइए
भारतीय न्याय संहिता (BNS) एवं भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) , महिलाओं, बच्चों, अनुसूचित जाति के सदस्यों आदि को
संरक्षण देने सम्बन्धी विधिक प्राविधान ,यातायात नियमों ,पर्यावरण ,संरक्षण ,वन्य जीव संरक्षण,मानवाधिकार संरक्षण ,सूचना का आधिकार
अधिनियम,आयकर, अधिनियम,भ्रष्टाचार विवारण अधिनियम,,राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम,आईटी अधिनियम,साइबर,अपराध,,जनहित
याचिका,महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय,भूमि सुधार,भूमि अधिग्रहण,भू-राजस्व, संबंधि कानूनों का सामान्य ज्ञान।
मूल विधि PYQ Series 01

1. उ.प्र. ज़मींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम –
(b) 1951 में
(c) 1952 में
(d) 1953
व्याख्या: उत्तर प्रदेश ज़मींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम, 1950 को 24 जनवरी 1951 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी, लेकिन इसे लागू करने की तिथि 1 जुलाई 1952 थी।
(b) अनु० 22
(c) अनु० 21
(d) अनु० 27(2)
व्याख्या: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 32 नागरिकों को उनके मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन (लागू कराने) के लिए सीधे सर्वोच्च न्यायालय में जाने का अधिकार देता है।
(b) उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय
(c) केवल जिला अदालत
(d) केवल उच्चतम न्यायालय
व्याख्या: एक जनहित याचिका (PIL) भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय या अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय के समक्ष दायर की जा सकती है।
(b) इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य परीक्षक
(c) अदालत द्वारा नियुक्त व्यक्ति
(d) केवल सरकारी परीक्षक
व्याख्या: केंद्र सरकार किसी भी अदालत के समक्ष इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पर विशेषज्ञ राय देने के लिए केंद्र या राज्य सरकार के किसी विभाग, निकाय या एजेंसी को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के परीक्षक के रूप में अधिसूचित कर सकती है।
(b) हैकिंग
(c) ट्रेसिंग
(d) तीनों
व्याख्या: फ़िशिंग निजी और संवेदनशील जानकारी, जैसे क्रेडिट कार्ड नंबर और लॉगिन क्रेडेंशियल प्राप्त करने का एक कपटपूर्ण (धोखाधड़ी) कार्य है।
(b) किसी श्रीधर का मामला
(c) रामेश्वर प्रसाद बनाम भारत संघ
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
व्याख्या: खोज परिणामों में किसी विशिष्ट पहले मामले की पहचान नहीं हो पाई है, हालांकि आईटी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कई मामले दर्ज किए गए हैं, जैसे धारा 66ए के तहत एफआईआर।
(b) धारा 66-A
(c) धारा 68-A
(d) धारा 69-A
व्याख्या: सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66C पहचान की चोरी (identity theft) के अपराध से संबंधित है।
(b) धारा 16
(c) धारा 17
(d) धारा 19
व्याख्या: आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 15 प्रमाणित करने वाले प्राधिकारी (Certifying Authorities) के नियंत्रक (Controller) के कार्यों का वर्णन करती है।
(b) किसी ऐसे मामले पर जिसमें राज्य सरकार पार्टी हो
(c) केवल निजी कंपनियों पर
(d) उपर्युक्त सभी
व्याख्या: यह अधिनियम कुछ प्रकार के दस्तावेजों या लेन-देन पर लागू नहीं होता है, जैसे कि वसीयत, ट्रस्ट या परक्राम्य लिखत (negotiable instruments), जब तक कि स्पष्ट रूप से अनुमति न दी जाए। यह केंद्र या राज्य सरकार के मामलों तक सीमित नहीं है।
10. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनु० 22(4) में निरोध (हिरासत) की अधिकतम अवधि कितनी कर दिया गया?
(a) 3 माह
(b) 2 माह
(c) 6 माह
(d) 1 वर्ष
उत्तर: (b) 2 माह
व्याख्या: 44वें संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 22(4) में संशोधन किया गया था ताकि बिना सलाहकार बोर्ड की समीक्षा के निवारक निरोध की अधिकतम अवधि को तीन महीने से घटाकर दो महीने किया जा सके।
(b) 1981
(c) 1982
(d) 1983
व्याख्या: राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) 23 सितंबर 1980 को पारित किया गया था।
(b) केवल वादी पर
(c) अभियोजन पक्ष पर
(d) इनमें से कोई नहीं
व्याख्या: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम जैसे कानूनों में, यदि अभियोजन पक्ष यह स्थापित करता है कि लोक सेवक ने अवैध संतुष्टि स्वीकार की है, तो यह साबित करने का भार अभियुक्त पर होता है कि उसने ऐसा क्यों किया (उपधारणा को खंडित करना)।
(b) 1988
(c) 1989
(d) 1990
व्याख्या: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम वर्ष 1988 में अधिनियमित किया गया था।
(b) 75
(c) 80
(d) 85
व्याख्या: आयकर अधिनियम, 1961 के तहत एक “सुपर सीनियर सिटीजन” (अनावासीय सहित) वह व्यक्ति है जिसकी आयु प्रासंगिक वर्ष में 80 वर्ष या उससे अधिक है।
(b) 1961
(c) 1962
(d) 1963
व्याख्या: वर्तमान आयकर अधिनियम (Income Tax Act) वर्ष 1961 में पारित किया गया था।
16. यदि कोई सूचना का अधिकार (राइट टू इन्फार्मेशन) आवेदक जन सूचना अधिकारी के निर्णय से संतुष्ट नहीं है, तो वह
(b) 60 दिनों के भीतर, केंद्रीय जन सूचना अधिकारी को शिकायत दर्ज कर सकता है।
(c) सीधे उच्च न्यायालय जा सकता है।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
व्याख्या: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अनुसार, प्रथम अपील 30 दिनों के भीतर प्रथम अपीलीय अधिकारी के पास दायर की जा सकती है।
(b) ऐसी लागत पर जो यथा संभव न्यूनतम मूल्य के लिए निहित है
(c) (a) या (b) जैसी स्थिति हो
(d) केवल (a)
व्याख्या: यदि जानकारी निर्धारित समय के भीतर प्रदान नहीं की जाती है, तो इसे निःशुल्क प्रदान किया जाता है। अन्यथा, एक न्यूनतम शुल्क लिया जाता है।
(b) सम्पूर्ण भारत पर है
(c) केवल केंद्र शासित प्रदेशों पर
(d) केवल राज्यों पर
व्याख्या: जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के बाद, सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 अब संपूर्ण भारत पर लागू होता है।
19. क्या पशु वध को मानवाधिकारों का उल्लंघन माना गया है?
(c) न्यायालय पर निर्भर है
(b) नहीं
(d) राष्ट्र पर निर्भर है
व्याख्या: पशुओं के पास तकनीकी रूप से मानवाधिकार नहीं होते हैं, जो केवल मनुष्यों के लिए हैं। हालांकि, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और विभिन्न उच्च न्यायालयों के फैसले पशु कल्याण और वध को कानूनी रूप से विनियमित करते हैं, इसलिए यह मामले की कानूनी व्याख्या और अदालती फैसलों पर निर्भर करता है।
(c) 37
(b) 38
(d) 39
व्याख्या: मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 37 मानवाधिकार उल्लंघनों की जाँच में सहायता के लिए विशेष जाँच टीमों (SIT) के गठन का प्रावधान करती है।
(c) 2 सप्ताह पूर्व
(b) 3 दिन पूर्व
(d) 2 घंटे पूर्व
(c) 1994 का अधिनियम क्रमांक-11
(b) 1994 का अधिनियम क्रमांक-10
(d) 1994 का अधिनियम क्रमांक-9
व्याख्या: मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 को 8 जनवरी 1994 को राजपत्र में प्रकाशित किया गया था, और इसका अधिनियम क्रमांक 1994 का 10 है।
(c) धारा 3
(b) धारा 111
(d) धारा 4
व्याख्या: “अपराध के आगम” (Proceeds of Crime) को आमतौर पर धन-शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) की धारा 2(1)(u) के तहत परिभाषित किया जाता है। छवि में दिए गए विकल्प किसी अन्य विशिष्ट अधिनियम के हो सकते हैं, संभवतः नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज एक्ट, 1985 (NDPS Act) के। NDPS Act की धारा 11(i) में यह प्रावधान हो सकता है।
(c) 2 वर्ष
(b) 4 वर्ष
(d) 5 वर्ष
व्याख्या: यह प्रश्न अस्पष्ट है क्योंकि “केन्द्रीय भूमिघर प्राधिकरण” की पहचान स्पष्ट नहीं हो पाई है। यदि यह किसी विशिष्ट राज्य या केंद्रीय प्राधिकरण से संबंधित है, तो नियम अलग-अलग होते हैं।
(c) 8 सितंबर, 1972
(b) 7 सितंबर, 1972
(d) 9 सितंबर, 1972
व्याख्या: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 को 9 सितंबर, 1972 को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हुई और उसी दिन यह लागू हुआ।
(c) अनु० 21
(b) अनु० 18
(d) अनु० 32
व्याख्या: सर्वोच्च न्यायालय ने जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) के तहत एक स्वच्छ पर्यावरण और प्रदूषण मुक्त हवा/पानी में जीने के अधिकार को मौलिक अधिकार माना है, जिसके उल्लंघन पर लोकहित याचिका (PIL) दायर की जा सकती है।
(c) 23-5-1986
(b) 14-11-1986
(d) 27-6-1996
व्याख्या: पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, 19 नवंबर, 1986 को प्रभावी हुआ था। दिया गया विकल्प (b) 14-11-1986 सबसे निकटतम है, हालांकि आधिकारिक तिथि 19 नवंबर है।
(c) केवल टैक्सी चालक
(b) केवल बस चालक
(d) सभी को
व्याख्या: यातायात के आदेशात्मक (Mandatory) चिन्ह सड़क के सभी उपयोगकर्ताओं (चालकों, साइकिल चालकों, पैदल चलने वालों) को अनिवार्य निर्देश देते हैं।
(c) धारा 89
(b) धारा 100
(d) धारा 110
व्याख्या: यह प्रश्न अस्पष्ट है क्योंकि “बार अधिक 1988” से संबंधित अधिनियम (संभवतः मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996) स्पष्ट नहीं है। विकल्प किसी अन्य अधिनियम की धाराओं से संबंधित हो सकते हैं।
(c) 20 मार्च 2015
(b) 20 फरवरी 2015
(d) 7 मार्च 2015
व्याख्या: मोटर वाहन अधिनियम, 1988 में 2015 में कोई बड़ा संशोधन नहीं हुआ था। प्रमुख संशोधन 2019 में हुए थे, जो 1 सितंबर 2019 को लागू हुए। यदि प्रश्न 2015 में अधिसूचित किसी विशिष्ट नियम की बात कर रहा है, तो 20 मार्च 2015 निकटतम विकल्प हो सकता है, लेकिन अधिनियम 2019 में संशोधित हुआ था।
(c) 26 जनवरी, 2016
(b) 26 जनवरी, 2015
(d) 26 मार्च 2016
व्याख्या: अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन अधिनियम, 2015 को 31 दिसंबर 2015 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली और यह 26 जनवरी, 2016 से प्रभावी हुआ।
(b) जम्मू-कश्मीर के सिवाय सम्पूर्ण भारत
(c) नगालैंड के सिवाय सम्पूर्ण भारत
(d) उपरोक्त कोई नहीं
व्याख्या: 2019 के बाद, यह अधिनियम अब पूरे भारत में लागू होता है।
Read More : Maths Chapter Wise Test Series
(c) 2004 में
(b) 2003 में
(d) 2006 में
व्याख्या: घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005, 26 अक्टूबर, 2006 को लागू हुआ।
(b) धारा 446 – कुर्की
(c) धारा 482 – अंतर्निहित शक्तियाँ
(d) धारा 426 – दंड स्थगन
व्याख्या: दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के संदर्भ में:
1.धारा 482 उच्च न्यायालय की अंतर्निहित शक्तियों से संबंधित है (सही)।
2.Dhara 426 अपील लंबित रहने के दौरान दंडादेश के निलंबन से संबंधित है (सही)।
3.धारा 446 मुचलके के संबंध में प्रक्रिया से संबंधित है (कुर्की नहीं)।
4.dhara 392 निर्णयों से संबंधित नहीं है (धारा 353 निर्णय से संबंधित है)।
इस आधार पर, (a) और (b) दोनों गलत युग्म हैं।
(c) धारा 130
(b) धारा 123
(d) धारा 110
व्याख्या: दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) की धारा 445 (बॉन्ड की राशि पर विचार) के अनुसार, ज़मानत के मामले में जुर्माना या दंड (शास्ति) अत्यधिक (दुर्भर) नहीं होना चाहिए। विकल्पों में दी गई धाराएँ (110, 112, 123, 130) शांति बनाए रखने या अच्छे व्यवहार के लिए सुरक्षा से संबंधित हैं, न कि शास्ति से। यह प्रश्न या विकल्प किसी पुराने कानून से संबंधित हो सकते हैं।
36. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 प्रवृत्त हुई।
(a) 1 जुलाई, 2024 को
(c) 1 अगस्त, 2024 को
(b) 6 दिसम्बर, 2024 को
(d) 31 जनवरी, 2024 में
उत्तर: (a) 1 जुलाई, 2024 को
व्याख्या: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (जो CrPC की जगह लेगी) 1 जुलाई, 2024 से प्रभावी हुई।
37. हत्या और मानव वध में अंतर से संबंधित वाद है-
(c) बारीन्द्र कुमार घोष बनाम एम्परर
(b) वीरेन्द्र कुमार घोष बनाम एमपरर
(d) कोई नहीं
व्याख्या: रेजिना बनाम गोविंदा (R vs Govinda, 1876) का मामला हत्या (Murder) और गैर-इरादतन मानव वध (Culpable Homicide not amounting to murder) के बीच अंतर करने के लिए एक ऐतिहासिक मामला है।
(b) ‘क’ हत्या का दोषी है और ‘ख’ को प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार नहीं है
(c) ‘क’ किसी हत्या का दोषी नहीं है किन्तु ‘ख’ को प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार है
(d) इनमें से कोई नहीं
व्याख्या: भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 84 के तहत, पागलपन के कारण किया गया कृत्य अपराध नहीं है। हालांकि, धारा 98 यह प्रावधान करती है कि पागल व्यक्ति के कृत्य के खिलाफ भी प्राइवेट प्रतिरक्षा (self-defence) का अधिकार उपलब्ध है।
39. निम्नलिखित वादों में कौन से सामान्य आशय से संबंधित हैं?
-
महबूब शाह बनाम एम्परर
-
वीरेन्द्र कुमार घोष बनाम एम्परर
-
डी.पी.पी. बनाम नियर्ज़
-
श्री कान्हैया बनाम भारत राज
नीचे दिये गये कूट की सहायता से सही उत्तर चुनिये-
(a) 1, 2 और 3
(c) 2, 3 और 4
(b) 1, 2 और 4
(d) 1, 3 और 4
उत्तर: (b) 1, 2 और 4
व्याख्या: महबूब शाह बनाम एम्परर, वीरेन्द्र कुमार घोष बनाम एम्परर, और श्री कान्हैया बनाम भारत राज के मामले सामान्य आशय (Common Intention – IPC धारा 34) की अवधारणा से संबंधित महत्वपूर्ण मामले हैं।
(c) 1 अगस्त, 2024 में
(b) 6 दिसम्बर, 2024
(d) 1 जुलाई 2024 में
व्याख्या: भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023, 1 जुलाई, 2024 से लागू हुई।
| UP SI Practice Set यहाँ से दें | क्लिक करें |