LT GIC TGT PGT Sanskrit Practice Set
UP TGT-PGT/ LT-GIC /NET / BPSC 4.0
संस्कृत
प्रैक्ट्रिस सेट सीरिज 10
व्याख्यात्म हल सहित
बिल्कुल पेपर में छपने वाले प्रश्नों का संग्रह
संस्कृत
प्रैक्ट्रिस सेट सीरिज 10
व्याख्यात्म हल सहित
बिल्कुल पेपर में छपने वाले प्रश्नों का संग्रह
1. ‘दत्तः में कौन सा प्रत्यय है?
(a) क्त (b) क्त्वा
(c) अनीयर्(d) यत्
Ans. (a) दा धातु से क्त प्रत्यय होने पर दत्तः’ शब्द निष्पन्न होता है कृत प्रत्यय का प्रयोग भूतकाल की क्रिया के स्थान पर किया जाता है।
(1) दा+क्त = दतः
(2) दा + क्त्वा = दत्वा
(3) दा + अनीयर= दानीय
(4) दा + यत् = देय
2. ‘सः अत्र तिष्ठेत्’ । रेखांकित शब्द में मूल धातु तथा लकार है-
(a) स्था, लङ्लकार
(b) स्था, विधिलिङ् लकार
(c) तिष्ठ, लट्लकार
(d) तिष्ठ लोट्लकार
Ans. (b) तिष्ठेत्-स्था धातु विधिलिङ् लकार प्रथम पुरुष एकवचन ।
(i) स्था, लङ्लकार प्रथमपुरुष एकवचन – अतिष्ठत्
(ii) स्था, विधिलिङ् लकार प्रथम पुरुष एकवचन – तिष्ठेत्
3. ‘युष्मांक गृहं कुत्र अस्ति’ इस वाक्य में सर्वनाम है-
(a) युष्माकम् (b) गृहम्
(c) कुत्र (d) अस्ति
Ans. (a) युष्माकं पद ‘युष्मद्’ का षष्ठी विभक्ति बहुवचन का रूप है जो संज्ञा के बदले प्रयुक्त किया जाय वही सर्वनाम है, अतः उपर्युक्त वाक्य में युष्माकं सर्वनाम है, जबकि गृहम् पद कर्म कारक संज्ञा है, कुत्र अव्यय पद तथा अस्ति क्रिया है।
4. ‘अस्’ धातु लङ्लकार मध्यमपुरुष द्विवचन का रूप है-
(a) आस्ताम् (b) स्याताम्
(c) आस्तम् (d) आस्व
Ans. (c) आस्तम् – अस् धातु लङ्लकार मध्यम पुरुष द्विवचन का रूप है।
लङ्लकार
एकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुष आसीत् आस्ताम् आसन्
मध्यम पुरुष आसी: आस्तम् आस्त
उत्तम पुरुष आसम् आस्व आस्म
5. ‘आता है’ के लिए संस्कृत में क्रिया प्रयुक्त होगी-
(a) प्रतिगच्छति (b) निर्गच्छति
(c) आगच्छति (d) अवगच्छति
Ans. (c) ‘आता है’ के लिए संस्कृत में आगच्छति’ पद का प्रयोग होता है।
(a) प्रतिगच्छति – ओर जाता है।
(b) निर्गच्छति – निकलता है।
(d) अवगच्छति – नीचे जाता है।
6. निम्नलिखित में कौन सा पद अव्यय है?
(a) राम (b) लता
(c) यथा (d) गुरु
Ans. (c) राम, लता तथा गुरु संज्ञा पद है जबकि यथा अव्यय पद है, अव्यय शब्द का रूप तीनों विभक्तियों, लिङ्ग तथा वचन में एक समान रूप चलता है।
7. ‘ज्ञात्वा’ में कौन सी धातु है?
(a) ज्ञा (b) ज्ञात्
(c) ज्ञ (d) ज्ञान
Ans. (a) ज्ञात्वा शब्द ‘ज्ञा’ धातु से क्त्वा प्रत्यय जुड़कर बनता है, पूर्वकालिक क्रिया का बोध कराने के लिए संस्कृत में धातु के ठीक बाद क्त्वा (त्वा) प्रत्यय जोड़ा जाता है। क्त्वा का त्वा’ प्रायः धातु में जैसा का वैसा जोड़ा जाता है।
जैसे-
• ज्ञा – ज्ञात्वा
• कृ – कृत्वा
• त्वा
• भू – भूत्वा
8. ‘पुष्पम’ में लिङ्ग है-
(a) पुल्लिङ्ग
(b) स्त्रीलिङ्ग
(c) नपुंसकलिङ्ग
(d) उपर्युक्त सभी लिङ्ग
Ans. (c) ‘पुष्पम्’ में नपुंसकलिङ्ग हैं, यह अकारान्त नपुंसकलिङ्ग है। व्याकरण, स्थान पुस्तक, फल, जल, ज्ञान इत्यादि शब्द भी अकारान्त नपुंसकलिङ्ग होते हैं।
“पुष्प” शब्द का रूप
(अकारांत नपुंसकलिंग शब्द रूप)
विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथमा पुष्पम् पुष्पे पुष्पाणि
द्वितीया पुष्पम् पुष्पे पुष्पाणि
तृतीया पुष्पेण पुष्पाभ्याम् पुष्पैः
चतुर्थी पुष्पाय पुष्पाभ्याम् पुष्पेभ्यः
पंचमी पुष्पात् पुष्पाभ्याम् पुष्पेभ्यः
षष्ठी पुष्पस्य पुष्पयोः पुष्पानाम्
सप्तमी पुष्पे पुष्पयोः पुष्पेषु
सम्बोधन हे पुष्प! हे पुष्पे! हे पुष्पाणि!
9. ‘प्रतिदिनम्’ में समास है-
(a) कर्मधारय (b) तत्पुरुष
(c) अव्ययीभाव (d) द्वन्द्व
Ans. (c) प्रतिदिनम् में अव्ययीभाव समास है।
ऐसा सामासिक पद जहाँ प्राय: दोनों में से प्रथम पद अव्यय तथा दूसरा पद संज्ञा हो वहाँ अव्ययीभाव समास होता है। इसका विग्रह-‘दिनं दिनं प्रति।
10. ‘उपेन्द्रः’ का सन्धि विच्छेद है-
(a) उप + इन्द्रः (b) उप + एन्द्रः
(c) उपा + इन्द्रः(d) उप + ऐन्द्रः
Ans. (a) उपेन्द्रः का सन्धि विच्छेद उप+इन्द्रः है। यहाँ पर vkn~xq.k% lw= से गुण सन्धि हुई है।
नियम : अ + इ = ए
अ + उ = ओ
अ + ऋ = अर्
अ + ऌ = अल्
जैसे-
रमा + ईश: = रमेशः
महा + उत्सव: = महोत्सव:
देव + ऋषि: = देवर्षि:
तव + ऌकार: = तवल्कार:
11. ‘भानुना’ में विभक्ति है-
(a) द्वितीया (b) तृतीया
(c) चतुर्थी (d) पञ्चमी
Ans. (b) ‘भानु’ शब्द का तृतीया विभक्ति एकवचन का रूप ‘भानुना’ है।
“भानु” (सूर्य) शब्द का रूप
(उकारांत पुल्लिंग शब्द रूप)
विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथमा भानु: भानू भानव:
द्वितीया भानुम् भानू भानून्
तृतीया भानुना भानुभ्याम् भानुभि:
चतुर्थी भानवे भानुभ्याम् भानुभ्य:
पंचमी भानो: भानुभ्याम् भानुभ्य:
षष्ठी भानो: भान्वो: भानूनाम्
सप्तमी भानौ भान्वो: भानुषु
संबोधन हे भानो! हे भानू! हे भानव:!
12. व्याकरण के त्रिमुनियों में कौन नहीं आता है?
(a) शाकटायन (b) महर्षि पतञ्जलि
(c) पाणिनि (d) कात्यायन
Ans. (a) व्याकरण के त्रिमुनियों में शाकटायन नही आते हैं।
व्याकरण के त्रिमुनियों में पाणिनि, पतञ्जलि और कात्यायन का नाम आता है। जिनके ग्रन्थ क्रमश: अष्टाध्यायी, महाभाष्य और वार्तिक है।
13. ‘तिष्ठति’ में धातु है-
(a) गच्छ (b) स्था
(c) तिष्ठ् (d) तिष्ठ
Ans. (b) तिष्ठति में स्था धातु के लट्लकार प्रथम पुरुष एकवचन का रूप है जबकि गच्छ, तिष्ठ ये धातु नहीं है। स्था (ठहरना) धातु के लट्लकार का रूप इस प्रकार है।
लट् लकार: (वर्तमान काल)
परस्मैपदी धातु
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम तिष्ठति तिष्ठतः तिष्ठन्ति
मध्यम तिष्ठसि तिष्ठथः तिष्ठथ
उत्तम तिष्ठामि तिष्ठावः तिष्ठामः
14. ‘सप्तविंशतिः’ शब्द का अर्थ है-
(a) सत्रह (b) सत्ताइस
(c) सैंतीस (d) सैंतालिस
Ans. (b) सप्तविंशति शब्द का अर्थ- सत्ताइस है
(a) सत्रह – सप्तदश
(c) सैंतीस – सप्तत्रिंशत्
(d) सैंतालिस – सप्तचत्वारिंशत्
15. ‘किमिव हि मधुराणां मण्डनं नाकृतीनाम्’- पंक्ति उदधृत है-
(a) मुद्राराक्षस से
(c) अभिज्ञानशाकुन्तलम्
(b) मृच्छकटिकम्
(d) स्वप्नवासवदत्तम् से
Ans. (c) किमिव हि मधुराणां मण्डनं नाकृतीनाम्-यह पंक्ति अभिज्ञानशाकुन्तलम् नाटक से उद्धृत है। इस श्लोक में दुष्यन्त ने शकुन्तला की सुन्दरता का वर्णन किया है।
सरसिजमनुविद्वं शैवलेनापि रम्यं
मलिनमपि हिमांशोर्लक्ष्म लक्ष्मीं तनोति ।
इयमधिकमनोज्ञा वल्कलेनापि तन्वी
किमिव हि मधुराणां मण्डले नाकृतीनाम ||
16. ‘भीत्रार्थानां भयहेतु: ‘ सूत्र का प्रयोग किया जाता है-
(a) कर्मकारक में (द्वितीया विभक्ति में )
(b) कारणकारक (तृतीया विभक्ति में)
(c) सम्प्रदानकारक (चतुर्थी विभक्ति में)
(d) अपादानकारक (पञ्चमी विभक्ति में)
Ans. (d) भीत्रार्थानां भयहेत: सूत्र अपादान कारक का सूत्र है। जो भय हेतु या जो भय का कारण है उसी को अपादान बना देता है। तथा जिससे अपादाने पञ्चमी सूत्र से पञ्चमी विभक्ति होती है।
उदाहरण –
‘चोराद् विभेति’- चोर से डरता है।
पपात् त्रायते – पाप से रक्षा करता है।
17. निम्नलिखित में से किसकी वृद्धि संज्ञा नही होती है?
(a) आ (b) आ
(c) ओ (d) ऐ
Ans. (c) ‘ओ’ वृद्धि संज्ञक वर्ण न होकर गुण संज्ञक वर्ण है ।
वृद्धि संज्ञा विधायक सूत्र है- ‘वृद्धिरादैच’ 1/1/1 अर्थात् आ, ऐ और औ इन तीनो वर्णों की वृद्धि संज्ञा होती है, जबकि ‘ओ’ की गुण संज्ञा होती है।
18. अकर्मक तथा सकर्मक का सम्बन्ध है-
(a) संज्ञा से (b) सर्वनाम से
(c) क्रिया से (d) विशेषण से
Ans. (c) अकर्मक तथा सकर्मक का सम्बन्ध क्रिया से है-
क्रिया के दो भेद होते हैं- (1) सकर्मक (2) सकर्मक
अकर्मक क्रिया – जिस क्रिया से सूचित होने वाला व्यापार कर्ता करे और उसका फल भी कर्ता पर पड़े उसे अकर्मक क्रिया कहते है।
जैसे- रमा गाती है, मोहन हँसता है।
सकर्मक क्रिया – जिस क्रिया से सूचित होने वाला व्यापार पर फल कर्ता पर न पड़कर कर्म पर पड़े। उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं।
जैसे –
बालक पुस्तक पढ़ता है।
लता पत्र लिखती है।
19. सन्धि कहते हैं-
(a) दो वर्णों के मेल को
(b) दो पदों के मेल को
(c) दो वाक्यों के मेल को
(d) दो से अधिक पदों के मेल को
Ans. (a) दो वर्णों के मेल को संधि कहते है। जबकि समास में दो या अधिक पदों का मेल होता है।
संधि के लिए दोनों वर्ण एक दूसरे के पास निकट होने चाहिए । वर्णों की इस समीप स्थिति को संहिता कहते हैं।
10. ‘घनश्याम:’ में कौन सा समास है?
(a) कर्मधारय (b) अव्ययीभाव
(c) द्विगु (d) द्वन्द्र
Ans. (a) जहाँ पर एक पद विशेषण तथा दूसरा पद विशेष्य हो, वहाँ पर कर्मधारय समास होता है। जैसे-घन इव श्यामः – घनश्याम
यहाँ पर घन तथा श्याम विशेषण विशेष्य है घनश्याम में उपमित कर्मधारय है। इसका सूत्र है- उपमानानि सामान्यवचनै: । उपमेय एवं उपमान दोनों ही इस समास में मिलकर आते हैं। अव्ययीभाव समास में प्राय: प्रथम पद अव्यय होता है तथा द्विगु समास में प्रथम पद संख्यावाची होता है । जबकि द्वन्द्व समास दोनो ही पर प्रधान होते है ।
11. ‘पठताम्’ रूप किस लकार पुरुष एवं वचन का है?
(a) लोट्लकार प्रथमपुरुष द्विवचन
(b) लोट्लकार मध्यमपुरुष, बहुवचन
(c) लोट्लकार उत्तमपुरुष द्विवचन
(d) लट्लकार प्रथमपुरुष द्विवचन
Ans. (a) ‘पठताम्’ पठ् धातु के लोट्लकार प्रथमपुरुष द्विवचन का रूप है।
लोट्लकार
प्रथम पुरुष पठतु पठताम् पठन्तु
मध्यम पुरुष पठ पठतम् पठत
उत्तम पुरुष पठानि पठाव पठाम
12. ‘अत्यधिक’ में सन्धि है-
(a) गुण सन्धि (b) वृद्धि सन्धि
(c) यण् सन्धि (d) हल् सन्धि
Ans. (c) अति + अधिक =अत्यधिक (इ+अ =य)शब्द में
इकोणचि सूत्र से यण् सन्धि हुई ही ।
नियम – इ → य्
उ → व्
ऋ → र् (असमान स्वर होने पर)
लृ →ल्
13. ‘ऋ’ वर्ण का उच्चारणस्थान है-
(a) कण्ठ (b) मूर्धा
(c) दन्त (d) ओष्ठ
Ans. (b) ऋ का उच्चारण स्थान ‘ऋटुरषाणां मूर्धा वृत्ति से मूर्धा है । ‘ऋटुरषाणां मूर्धा अर्थात् ऋ ट वर्ग र तथा ष का उच्चारण स्थान मूर्धा है।
कण्ठ → क वर्ग (अकुहविसर्जनीयानां कण्ठः)
मूर्धा → ट वर्ग (ऋटुरषाणां मूर्धा )
दन्त → त वर्ग (लृतुलसानां दन्ताः)
ओष्ठ→ प वर्ग (उपूध्मानीयानाम् ओष्ठौ)
14. संस्कृत में धातुरूप कहते हैं-
(a) संज्ञा को (b) सर्वनाम को
(c) क्रियापद (d) प्रत्यय को
Ans. (c) संस्कृत में संज्ञा तथा सर्वनाम पदों को शब्दरूप कहते हैं। जबकि क्रिया पद धातुरूप कहलाता है।
पढ़ना, लिखना, बोलना, हँसना, देखना इत्यादि क्रियाएँ है जिनकी क्रमशः धातु है पठ् , लिख् , ब्रू, हस् , दृश् ।
15. “नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः। न चैनं क्लेदयन्त्यापो नशोषयति मारुतः॥”
प्रस्तुत श्लोक किस ग्रन्थ से लिया गया है ?
(a) श्रीमद्भगवद्गीता (b) नीतिशतकम्
(c) भामिनीविलास (d) कुमारसम्भवम्
Ans. (a) श्रीमद्भगवतगीता में आत्मा का वर्णन करते हुए भगवान् श्रीकृष्ण इस श्लोक को कहते हैं। यह श्लोक श्रीमद्भगवद्गीता के दूसरे अध्याय का 23वा श्लोक है, जिसका अर्थ है- शस्त्र इस आत्मा को काट नही सकते। अग्नि इसको जला नही सकती, जल इसको गीला नही कर सकता और वायु इसको सुखा नहीं सकती।
16. ‘त्रिवेणी’ पद में कौन सा समास है?
(a) द्वन्द्व समास
(b) तत्पुरुष समास
(c) अव्ययीभाव समास
(d) द्विगु समास
Ans. (d) त्रिवेणी पद में प्रथम पद संख्यावाची होने से संख्या पूर्वो द्विगुः सूत्र से द्विगु समास है। यह तत्पुरूष का ही भेद है। तत्पुरूष समास में द्वितीय पद प्रधान होता है । द्वन्द्व समास में दोनो पद प्रधान होते है जबकि अव्ययीभाव में प्राय: पूर्व पद अव्यय होता है और उसी की प्रधानता होती है ।
17. ‘अभवन्’ में लकार है-
(a) लट् (b) लोट्
(c) विधिलिङ् (d) लृट्
Ans. (d) अभवन् में लङ्लकार हैं। अभवन् भू धातु के लङ्लकार प्रथम पुरुष बहुवचन का रूप है।
लङ्लकार
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष अभवत् अभवताम् अभवन्
मध्यपुरुष अभवः अभवम् अभवत
उत्तमपुरुष अभवम् अभवाव अभवाम
88. ‘हसथ’ रूप है-
(a) लट्लकार का
(b) लृट्लकार का
(c) विधिलिङ्लकार का
(d) लोट्लकार का
Ans. (a) ‘हसथ’ हस् धातु का लट् लकार मध्यमपुरुष बहुवचन का रूप है।
इसके रूप इस प्रकार है –
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष हसति हसतः हसन्ति
मध्यपुरुष हससि हसथः हसथ
उत्तमपुरुष हसामि हसावः हसामः
19. माहेश्वर सूत्रों की संख्या है-
(a) तेरह (b) चौदह
(c) पन्द्रह (d) सोलह
Ans. (b) माहेश्वर सूत्र की संख्या-14 है। जो भगवान् शंकर के डमरू से निकलकर आचार्य पाणिनि को प्राप्त हुए हैं ।
चौदह माहेश्वर सूत्र
(1) अइउण् (2) ऋलृक् (3) एओङ् (4) ऐऔच (5) हयवरट (6) लण् (7) ञमङणनम् (8) झभञ् (9) घढ़धष् (10) जबगडदश् (11) खफछठथचटतव् (12) कपय् (13) शषसर् (14) हल्
20. अपादान कारक में कौन सी विभक्ति होती है?
(a) प्रथमा
(b) पञ्चमी
(c) तृतीया
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Ans. (b) आपादान कारक में अपदाने पञ्चमी सूत्र से पञ्चमी विभक्ति का प्रयोग होता है। जबकि कर्ता कारक में प्रथमा तथा करण में तृतीया विभक्ति का प्रयोग होता है।
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